- **'मोहम्मद दीपक' आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं: 5 महीनों से किराया नहीं दिया, जिम बेचने पर मजबूर**

**'मोहम्मद दीपक' आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं: 5 महीनों से किराया नहीं दिया, जिम बेचने पर मजबूर**

मोहम्मद दीपक, जिन्होंने कोटद्वार में मुसलमानों के समर्थन में आवाज़ उठाई थी, इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वह तो अब अपना जिम बेचकर कोटद्वार हमेशा के लिए छोड़ने के बारे में भी सोच रहे हैं।

दीपक कुमार—एक जिम मालिक, जिन्हें उत्तराखंड के कोटद्वार में ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से पहचान मिली थी—इस समय गहरे आर्थिक संकट से गुज़र रहे हैं। कभी सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र रहे दीपक आज अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वह कहते हैं, "सोशल मीडिया पर हीरो बनने से घर में रोटी नहीं आती," यह बात उनकी मौजूदा मुश्किल स्थिति को साफ तौर पर बयां करती है।

दीपक कुमार पहली बार जनवरी 2026 में सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में आवाज़ उठाई थी और खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था। इस घटना का एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो गया था, और लगभग रातों-रात वह सोशल मीडिया पर एक जाना-माना चेहरा बन गए थे। हालाँकि, यह लोकप्रियता लंबे समय तक उनके लिए फायदेमंद साबित नहीं हुई; इसके विपरीत, इसका उनके निजी जीवन और उनके कारोबार, दोनों पर ही बुरा असर पड़ा।


**मोहम्मद दीपक के जिम में सदस्यों की संख्या में गिरावट**
दीपक कोटद्वार में ‘हल्क जिम’ नाम से एक फिटनेस सेंटर चलाते हैं, जो उनके परिवार की कमाई का मुख्य ज़रिया है। लेकिन, विवादों के बाद से उनके जिम का कारोबार लगातार गिरता जा रहा है। जहाँ पहले जिम में सदस्यों की संख्या काफी ज़्यादा हुआ करती थी, वहीं आज बहुत कम लोग ही बचे हैं। वह बताते हैं कि उनके आस-पास बने खराब माहौल और विवादों की वजह से वह नए ग्राहक नहीं जोड़ पा रहे हैं, जिसका सीधा बुरा असर उनकी कमाई पर पड़ा है।

**पांच महीनों से जिम का किराया नहीं दे पाए**
इस समय उनकी सबसे बड़ी समस्या जिम का किराया है। दीपक पिछले लगभग पांच महीनों से जिम का किराया नहीं दे पाए हैं। बताया जा रहा है कि जिम का हर महीने का किराया करीब ₹40,000 है—एक ऐसी रकम जिसे चुकाना अब उनके लिए दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। किराया न चुका पाने की वजह से उन्हें अपने मकान मालिक से चेतावनी भी मिली है, जिससे उनकी मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं।

**हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं**
दीपक यह भी आरोप लगाते हैं कि विवाद के बाद, कुछ लोग जान-बूझकर उनके ग्राहकों को जिम आने से रोक रहे हैं, जिससे उनके कारोबार को और भी ज़्यादा नुकसान पहुँच रहा है। हालाँकि, इस मामले में अधिकारियों के पास कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। इसके बावजूद, उन्हें लगातार नुकसान हो रहा है, और हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।

**जिम बेचने और कोटद्वार छोड़ने पर मजबूर**
आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई है कि दीपक अब अपना जिम बेचने और यहाँ तक कि कोटद्वार छोड़ने के बारे में भी सोच रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए, इस कारोबार को चलाना नामुमकिन है, और उन्हें अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कोई नया रास्ता ढूँढ़ना ही होगा।

यह पूरी घटना इस बात को उजागर करती है कि सोशल मीडिया पर मिली लोकप्रियता हमेशा स्थायी या सकारात्मक नतीजे नहीं देती। दीपक की कहानी वायरल शोहरत और असल ज़िंदगी के हालात के बीच अक्सर मौजूद भारी अंतर को दिखाती है।

आज, दीपक के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने परिवार का भरण-पोषण करना है। उनकी मुश्किल स्थिति यह साफ़ कर देती है कि सिर्फ़ पहचान या समर्थन काफ़ी नहीं है; बल्कि, एक संतोषजनक जीवन के लिए स्थिर आय, सामाजिक संतुलन और एक सुरक्षित माहौल बेहद ज़रूरी हैं।



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