- टैक्सी ऑपरेटरों ने जंतर-मंतर पर शक्ति प्रदर्शन किया और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया।

टैक्सी ऑपरेटरों ने जंतर-मंतर पर शक्ति प्रदर्शन किया और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया।

दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट संजय सम्राट की लीडरशिप में मंगलवार को जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट किया गया। सरकार से कई मांगें की गईं।

दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट संजय सम्राट की लीडरशिप में मंगलवार को जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रोटेस्ट किया गया। प्रोटेस्ट में टैक्सी, टूरिस्ट और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। ऑर्गनाइजेशन का आरोप है कि उनकी कई मुख्य मांगें सालों से पेंडिंग हैं और केंद्र और राज्य सरकारें उन्हें लगातार नज़रअंदाज़ कर रही हैं।

प्रोटेस्ट को संबोधित करते हुए संजय सम्राट ने कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकारें, खासकर ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री, अब भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती हैं, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में सभी ड्राइवर अपनी बाहों पर काली पट्टी बांधकर अपनी गाड़ियां चलाएंगे, इसे शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट का सिंबल बताया।

 "यात्रियों को असली समस्याओं से अवगत कराया जाएगा"
उन्होंने कहा कि हर घरेलू और विदेशी यात्री को इस सेक्टर की असली समस्याओं से अवगत कराया जाएगा ताकि आम जनता टैक्सी और ट्रांसपोर्ट बिज़नेस के मौजूदा हालात को समझ सके। संगठन ने पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी को अपनी मांगों का एक मेमोरेंडम देने की घोषणा की है। संजय सम्राट ने कहा कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो वे अब अपनी शिकायतें भगवान के सामने रखेंगे।

'भगवान के दरबार' में अपील करने की तैयारी
संगठन ने आंदोलन के अगले चरण की भी घोषणा की है। संजय सम्राट ने कहा कि एक चिट्ठी अयोध्या में राम मंदिर और दूसरी हनुमान मंदिर में दी जाएगी। उन्होंने कहा कि चूंकि जनप्रतिनिधि उनकी आवाज नहीं सुन रहे हैं, इसलिए वे भगवान से मंत्रियों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना करेंगे ताकि ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर की समस्याओं का समाधान हो सके।

बाइक टैक्सी और ऐप-बेस्ड कंपनियों पर सवाल
संगठन की मुख्य मांगों में प्राइवेट नंबर प्लेट वाली बाइक टैक्सी पर बैन लगाना शामिल है। आरोप है कि ये गाड़ियां बिना सही इंश्योरेंस और पुलिस वेरिफिकेशन के सड़कों पर चल रही हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और पुराने टैक्सी ड्राइवरों की रोजी-रोटी को खतरा है।

ऐप-बेस्ड टैक्सी कंपनियों के किराए के स्ट्रक्चर पर भी सवाल उठाए गए। संगठन ने कहा कि पिछले दस सालों से किराए नहीं बढ़ाए गए हैं, जबकि कमीशन रेट बढ़ते जा रहे हैं। ड्राइवर की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी दोहराई गई।

पैनिक बटन, VLTD और टेक्निकल ज़रूरी शर्तों पर आपत्ति
पैनिक बटन और गाड़ी की लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस के लिए 10,000 से 20,000 रुपये तक चार्ज लेने के आरोप लगाए गए। संगठन ने कहा कि टेक्निकल रूप से खराब सिस्टम को जबरदस्ती लागू करने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने इसे ज़रूरी कैटेगरी से हटाने की मांग की।

बस बॉडी कोड AIS-153 को लेकर भी नाराजगी जताई गई। पहले से बनी बसों पर नया कोड लागू करने को गलत बताया गया। इसी तरह, ऑल इंडिया परमिट गाड़ियों के लिए ज़रूरी 80 kmph स्पीड लिमिट डिवाइस को हटाने की मांग की गई।

 ई-व्हीकल पॉलिसी और टैक्स नियमों में बदलाव की मांग
ई-व्हीकल पॉलिसी पर दोबारा सोचने की मांग करते हुए कहा गया कि बिना सही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और साफ गाइडलाइंस के इसे लागू करने से छोटे ऑपरेटरों पर एक्स्ट्रा बोझ पड़ेगा। 60 दिनों के अंदर राज्य में वापस आने वाले ऑर्डर को भी रद्द करने की मांग की गई, क्योंकि ऑल इंडिया परमिट वाली गाड़ियां पहले से ही टैक्स देती हैं।

उत्तर प्रदेश की 15 साल की एकमुश्त टैक्स पॉलिसी को गलत बताया गया, जबकि राजस्थान में टूरिस्ट गाड़ियों के लिए सामान ले जाने वालों पर कार्रवाई रोकने की मांग की गई। उत्तराखंड चारधाम यात्रा पॉलिसी में 15 दिन की लिमिट हटाने और छह महीने का परमिट देने की भी अपील की गई।

ई-चालान, HSRP और टोल टैक्स से नाराजगी
संगठन ने फर्जी ई-चालान और ब्लैकलिस्टिंग पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि इससे ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। HSRP प्लेट से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई, जिसमें ₹200 की प्लेट के लिए ₹1,000 तक वसूले जाने के आरोप भी शामिल हैं।

दिल्ली में MCD टोल टैक्स को डबल वसूली बताया गया और इसे खत्म करने की मांग की गई। साथ ही, स्टेट टैक्स पोर्टल में तकनीकी खामियों और अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाने की भी अपील की गई।

देश भर में आंदोलन की चेतावनी
संजय सम्राट ने साफ किया कि यह विरोध किसी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने हक के लिए है। उन्होंने कहा कि अगर सरकारें जल्द ही कोई हल नहीं निकालती हैं, तो यह विरोध देश भर में आंदोलन का रूप ले सकता है।

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