कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मदरसों की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर फंडिंग की जांच करनी है, तो यह सिर्फ़ मदरसों तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें RSS और बड़े मंदिरों के फंड को भी शामिल किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई का यह बयान मदरसों और उनके फंडिंग सोर्स की जांच को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि अगर जांच करनी है, तो यह सिर्फ़ मदरसों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।
हुसैन दलवई ने कहा, "अगर आप मदरसों की जांच कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि उनके पास फंड कहां से आता है, तो मैं पूछता हूं, RSS के पास फंड कहां से आता है? उसकी भी जांच करो। बड़े मंदिरों के पास फंड कहां से आता है? उसकी भी जांच करो। बात यह है कि सिर्फ़ मदरसों की बात क्यों? सबकी बात करो।"
दलवई के बयान से राजनीतिक गलियारों में ज़ोरदार चर्चा शुरू हो गई है। उनका तर्क है कि किसी एक समुदाय या संस्थान को निशाना बनाना सही नहीं है।
सरकार की मंशा पर सवाल
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मदरसों की जांच के नाम पर एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में कई सामाजिक, धार्मिक और वैचारिक संगठन काम कर रहे हैं, जिन्हें अलग-अलग सोर्स से फंड मिलता है। इसलिए, अगर पारदर्शिता ही मकसद है, तो यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
RSS और मंदिरों का ज़िक्र
अपने बयान में, दलवई ने साफ़ तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बड़े मंदिरों का नाम लिया, और कहा कि इन संगठनों को मिलने वाले फंड की भी उसी तरह जांच होनी चाहिए जैसे मदरसों की हो रही है। उनका मानना है कि निष्पक्षता और विश्वास बनाए रखने के लिए यह ज़रूरी है।
इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने की उम्मीद है। विपक्ष इस मुद्दे को उठाकर सरकार पर दबाव बना सकता है। फिलहाल, मदरसों की जांच का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।