बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे आज करीब छह किताबें लेकर लोकसभा में आए और उन किताबों का हवाला देते हुए जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इससे सदन में भारी हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
आज लोकसभा में उस समय भारी हंगामा हुआ जब धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे छह किताबें लेकर सदन में आए और उनसे उद्धरण देते हुए पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। विपक्षी सांसद भड़क गए और सदन में हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने स्पीकर से शिकायत की। स्पीकर ने लिखित शिकायत मांगी है।
पीठासीन अधिकारी के रोकने की कोशिश करने पर भी दुबे नहीं रुके।
दरअसल, जब निशिकांत दुबे किताबों के आधार पर पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बारे में दावे कर रहे थे, तो पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन निशिकांत दुबे नहीं रुके और बोलते रहे। उन्होंने नेहरू को "अयोग्य प्रधानमंत्री" बताया और "इंदिरा गांधी-जॉन मथाई... संबंधों" का जिक्र किया।
विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया
निशिकांत दुबे की आपत्तिजनक टिप्पणियों से विपक्षी सांसद भड़क गए और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। विपक्ष का आरोप है कि विपक्ष के नेता और बीजेपी सांसद के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जा रहे हैं।
विपक्षी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की
विपक्षी सांसदों ने निशिकांत दुबे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने इस मामले में स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा। स्पीकर ने विपक्षी सांसदों से अपनी शिकायत लिखित में देने को कहा।
अगर मैं कुछ कहूंगा तो हंगामा होगा - निशिकांत दुबे
निशिकांत दुबे यहीं नहीं रुके। शाम करीब 4:30 बजे उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर जवाहरलाल नेहरू द्वारा जनरल करिअप्पा को लिखा एक पत्र पोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, "अगर मैं कुछ कहूंगा तो हंगामा होगा, क्या कांग्रेस की लंका में आग लग जाएगी? क्या नेहरू-गांधी परिवार कट्टर दुश्मन बन जाएंगे?" संसद, लोकतंत्र और देश की जनता का अपमान - प्रियंका गांधी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "जब मोदी सरकार सदन को डिस्टर्ब करना चाहती है, तो वे निशिकांत दुबे को खड़ा करके बुलवाते हैं। जबकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी को संसद में पब्लिश किताब से कोट करने की इजाज़त नहीं दी गई, वहीं निशिकांत दुबे छह किताबें लेकर खुलेआम दिखा रहे हैं और उनसे कोट कर रहे हैं, लेकिन उनका माइक बंद नहीं किया जा रहा है।" उन्होंने दावा किया, "मोदी सरकार यह दिखाना चाहती है कि संसद में सिर्फ़ उन्हीं का कंट्रोल है।
यह स्पीकर के पद, संसद, लोकतंत्र और देश की जनता का अपमान है।"
प्रियंका ने कहा कि विपक्ष का नेता सिर्फ़ एक व्यक्ति नहीं होता, बल्कि पूरे विपक्ष का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका मतलब है कि सरकार उन लाखों लोगों को चुप कराना चाहती है जिन्होंने विपक्षी सांसदों को वोट दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा, "एक तरफ़ विपक्ष के नेता को बोलने से रोका जाता है, वहीं दूसरी तरफ़ किसी को भी खड़ा होकर हर तरह की बेवकूफी भरी बातें कहने की इजाज़त दी जाती है। सदन में बार-बार..." "नेहरू का नाम लिया जा रहा है। यह ध्यान भटकाने की एक चाल है, देश का ध्यान भटकाने की एक टैक्टिक है।"