RBI ने सेवाओं के निर्यात और आयात से जुड़े विदेशी मुद्रा नियमों में ढील दी है। आइए देखें कि इसका उन फ्रीलांसरों, कंपनियों और आयातकों के लिए क्या मतलब है, जिन्हें विदेशों से भुगतान मिलता है।
अगर आप विदेशी क्लाइंट्स के लिए काम करते हैं, या आपकी कंपनी विदेशों से सेवाएं लेती है, तो आपके लिए अच्छी खबर है: RBI ने सेवाओं के निर्यात और आयात से जुड़े विदेशी मुद्रा नियमों को आसान बना दिया है। इससे अलग-अलग 'एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म' (निर्यात घोषणा पत्र) भरने की जरूरत कम हो जाएगी और बैंकों के साथ रिपोर्टिंग की प्रक्रिया सरल हो जाएगी।
RBI ने ये बदलाव कम मूल्य वाले लेन-देन और सेवाओं के भुगतान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए किए हैं। इससे विशेष रूप से भारत में रहने वाले उन लोगों को फायदा होगा, जो विदेशी क्लाइंट्स को डिजिटल या अन्य प्रकार की सेवाएं देते हैं और विदेशी मुद्रा में भुगतान प्राप्त करते हैं।
विदेशों से भुगतान पाने वालों के लिए क्या बदला है?
RBI के नए नियमों के तहत, भारत में रहने वाले किसी व्यक्ति को, जो विदेशों में दी गई सेवाओं के लिए भुगतान प्राप्त करता है, अब अलग से 'एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म' (EDF) जमा करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, उस व्यक्ति को बस अपने बैंक को जरूरी जानकारी देनी होगी, ताकि भुगतान उनके खाते में जमा हो सके।
उदाहरण के लिए, अगर भारत का कोई फ्रीलांसर किसी विदेशी कंपनी के लिए वेबसाइट डिजाइन करता है और उसके बदले भुगतान पाता है, तो उसे अलग से EDF भरने की जरूरत नहीं होगी; बस बैंक को जरूरी जानकारी देना ही काफी होगा।
और किसे फायदा होगा?
ये बदलाव सिर्फ फ्रीलांसरों तक सीमित नहीं हैं। अन्य निर्यातक—भले ही वे भारत के निवासी न हों—भी कुछ शर्तों के साथ इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। ऐसे निर्यातकों के लिए, अगर सेवाओं के बदले विदेशों से मिलने वाला भुगतान ₹10 लाख तक है, तो उन्हें केवल बैंक को जरूरी जानकारी देनी होगी। अगर भुगतान ₹10 लाख से ज्यादा है, तो मौजूदा घोषणा संबंधी नियम लागू रहेंगे।
सेवाओं के आयात के बारे में क्या?
RBI ने सेवाओं के आयात के लिए भी रिपोर्टिंग नियमों में बदलाव किया है। अब बैंकों को कुछ खास शर्तें पूरी होने पर 'इंपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम' (IDPMS) में सेवाओं के आयात का विवरण दर्ज करना होगा। पहली शर्त यह है कि सेवा लेने वाली इकाई या व्यक्ति भारत का निवासी न हो। दूसरी शर्त यह है कि इनवॉइस की राशि ₹10 लाख से अधिक होनी चाहिए।