- राहुल गांधी की मनुस्मृति पर की गई टिप्पणी से निशिकांत दुबे नाराज़; 'दूसरे धर्मों का भी...' ज़िक्र किया।

राहुल गांधी के *मनुस्मृति* पर दिए गए बयानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस राजनीतिक बहस के बीच, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उन पर निशाना साधा है।

शनिवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पितृसत्तात्मक सोच पर कड़ा प्रहार किया और महिलाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को दूसरों पर निर्भर रखना "*मनुस्मृति* वाली सोच" का हिस्सा है और महिलाओं से अपने अधिकारों के लिए आगे आने का आग्रह किया।

राहुल गांधी के इस बयान से हंगामा मच गया है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे पर उन्हें घेरा है। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "राहुल गांधी जी, ब्रिटेन के गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स ने 27 मार्च 1775 को 11 पंडितों (विद्वानों) की एक समिति बनाई थी, जिसका मकसद भारत में उपलब्ध सभी संस्कृत और पाली ग्रंथों का अनुवाद करना और उनका अध्ययन करना था।"

राहुल गांधी के बयान पर निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया

मनुस्मृति पढ़ना आपसे न हो पाएगा...', राहुल गांधी पर निशिकांत दुबे का तंज, श्लोक लिखकर घेरा - rahul gandhi manusmriti statement women empowerment bjp reaction ntc dhrj - AajTak
दुबे ने आगे कहा, "आज भारत में जिन ग्रंथों पर चर्चा होती है, उनका अनुवाद उसी ब्रिटिश समिति ने किया था। अनुवाद सहित समिति की रिपोर्ट 1777 में गवर्नर-जनरल को सौंपी गई थी। 1777 की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि *मनुस्मृति* के कुछ श्लोक सही हैं, जबकि कुछ गलत हैं; इसमें यह भी बताया गया है कि यह ग्रंथ एक पौराणिक काल का है और अन्य विद्वानों ने *मनुस्मृति* में अपने शब्द जोड़ने की कोशिश की थी।"

कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए दुबे ने कहा, "सनातन धर्म के अलावा, पार्टी को दूसरे धर्मों के धार्मिक ग्रंथों में भी ऐसी ही सोच की जांच करनी चाहिए। यह देश हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों का समान रूप से है।" उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को फिर से हवा दे दी है।

राहुल गांधी का बयान

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राहुल गांधी ने पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं हैं और वे केवल अपनी हैं। उन्होंने युवा महिलाओं से सामाजिक बंधनों को तोड़ने और आगे बढ़ने का आह्वान किया। 'जेन-ज़ी' (Gen Z) की छात्राओं की बड़ी सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम राजनीति के बारे में नहीं था, बल्कि इसका मकसद युवाओं की सोच, शिक्षा प्रणाली में भेदभाव और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना था। इस कार्यक्रम के दौरान, कई छात्रों ने मंच पर आकर अपनी निजी चुनौतियों और अनुभवों को साझा किया।

 

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