- केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कहते हैं: "ममता बनर्जी चुनाव हार गई हैं; उनकी लोकप्रियता भी खत्म हो गई है।"

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कहते हैं:

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पिछले 15 सालों में गरीबी, बेरोज़गारी और शिक्षा से जुड़े घोटालों जैसे मुद्दों को हल करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है।

बिहार से ताल्लुक रखने वाले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर एक अहम बयान दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया कि उनकी लोकप्रियता कम हो गई है और असल में वह यह चुनाव पहले ही हार चुकी हैं।

अपने बयान में गिरिराज सिंह ने कहा, "ममता बनर्जी की लोकप्रियता घट गई है और वह यह चुनाव पहले ही हार चुकी हैं। पिछले 15 सालों में वह गरीबी, शिक्षा घोटालों या बेरोज़गारी जैसे गंभीर मुद्दों को हल करने में नाकाम रही हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद, राज्य की बुनियादी समस्याओं को हल करने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया है।

**'हताशा में गृहयुद्ध जैसा माहौल बनाने की कोशिश'**
उन्होंने आगे कहा, "हताशा में ममता बनर्जी गृहयुद्ध जैसा माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं। वह इस बारे में बात नहीं करेंगी कि राज्य के कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें कब लागू होंगी। वह बेरोज़गारी के मुद्दे पर नहीं बोलेंगी। महिलाओं के लिए ₹3,000 के मासिक भत्ते की घोषणा करने के बजाय, वह इस मामले पर चुप रहती हैं। फिर भी, वह महिलाओं को वोटिंग बूथ पर जाकर गृहयुद्ध जैसा माहौल बनाने का निर्देश देती हैं।"

**इस रवैये को 'अलोकतांत्रिक' बताया**
इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र का अपमान बताते हुए गिरिराज सिंह ने कहा, "एक तरह से, यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है। वह पहले ही हार चुकी हैं। पिछले 15 सालों में उन्होंने गरीबी पर ध्यान नहीं दिया; उन्होंने शिक्षा घोटालों के बारे में बात नहीं की; उन्होंने बेरोज़गारी पर चर्चा नहीं की; उन्होंने कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग को लागू करने पर ध्यान नहीं दिया; और न ही उन्होंने महिलाओं को ₹3,000 का मासिक भत्ता देने के बारे में बात की। वह बस इस तरह का माहौल बनाना चाहती हैं ताकि सरकार की नाकामियों पर चर्चा न हो।"

**चुनावों से पहले राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़**
पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले, इस तरह के बयानों से राजनीतिक माहौल और भी गरमा गया है। एक ओर जहाँ सत्ताधारी दल अपनी उपलब्धियों को गिना रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष लगातार प्रासंगिक सवाल उठा रहा है। गिरिराज सिंह के बयान को इस जारी राजनीतिक घमासान का एक और पहलू माना जा रहा है, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप का दौर और भी तेज़ हो गया है।

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