- 'चुनाव हारने के बाद कोर्ट का सहारा न लें,' सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को कड़ी फटकार लगाई।

'चुनाव हारने के बाद कोर्ट का सहारा न लें,' सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को कड़ी फटकार लगाई।

जन सूरज पार्टी ने 2025 के बिहार चुनावों को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के लिए रोज़गार योजना का पैसा वोटिंग से ठीक पहले महिलाओं को बांटा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने जन सूरज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि चुनाव हारने के बाद कोर्ट का सहारा नहीं लेना चाहिए। 2025 के बिहार चुनावों में करारी हार के बाद, प्रशांत किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि महिलाओं के रोज़गार योजना का पैसा चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के खातों में जमा किया गया, जिससे चुनाव प्रभावित हुआ। हालांकि, चुनाव आयोग ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि जब जनता आपको नकार देती है, तो लोकप्रियता हासिल करने के लिए कोर्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

जन सूरज पार्टी द्वारा दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस याचिका में 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों को अवैध घोषित करने और उन्हें रद्द करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वह नोटिस जारी नहीं कर सकता। चीफ जस्टिस ने कहा कि चुनाव याचिका किसी खास चुनाव को चुनौती देती है। आप एक ही याचिका में पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। यह स्वीकार्य नहीं है।

चीफ जस्टिस ने क्या कहा?
जन सूरज पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और कोर्ट को इसमें दखल देना चाहिए और जवाब मांगना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एक सख्त टिप्पणी में कहा, "चुनाव हारने के बाद कोर्ट का सहारा न लें।" चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सवाल किया कि उनकी राजनीतिक पार्टी को कितने वोट मिले। कोर्ट ने कहा कि जब जनता आपको चुनाव में नकार देती है, तो लोकप्रियता हासिल करने के लिए कोर्ट के मंच का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। चीफ जस्टिस ने साफ कहा कि अगर चाहें तो योजना को चुनौती दे सकते हैं, लेकिन यहां मुख्य मांग चुनाव रद्द करने की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित राज्य में हाई कोर्ट मौजूद है, और याचिकाकर्ता को पहले वहां जाना चाहिए था।

बिहार चुनावों में क्या हुआ?
बिहार में 6 और 11 नवंबर 2025 को वोटिंग हुई। इस बीच, महिलाओं के रोज़गार योजना का पैसा 26 सितंबर से लाभार्थियों के खातों में जमा होना शुरू हो गया था। अक्टूबर में भी कई महिलाओं के खातों में पैसा जमा किया गया था। इसी वजह से RJD ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी और इस प्रैक्टिस को रोकने की मांग की थी।

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