नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अवैध ड्रग कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने एक अंतर-राज्यीय फार्मास्युटिकल ड्रग डायवर्जन (दवाओं की हेराफेरी) मामले में, लगभग 20.10 करोड़ रुपये मूल्य की 25 अचल संपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश की पुष्टि की है।
इस बड़े ऑपरेशन में, NCB ने लगभग 20.10 करोड़ रुपये मूल्य की 25 अचल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है। इनमें इंडस्ट्रियल प्लॉट, कमर्शियल यूनिट, दुकानें, ऑफिस और रिहायशी फ्लैट शामिल हैं। 30 अक्टूबर 2024 को, NCB ने इन संपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश की पुष्टि की। यह आदेश मूल रूप से 2 अक्टूबर 2024 को NDPS एक्ट की धारा 68F(2) के तहत जारी किया गया था।
**7 राज्यों में फैला था ड्रग नेटवर्क**
NCB की जांच से पता चला है कि प्रतिबंधित और साइकोट्रोपिक (मानसिक स्थिति पर असर डालने वाली) दवाओं की बिक्री से मिली रकम को जांच के दायरे में आई कंपनियों के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया था। आरोपी अपने या अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई इन संपत्तियों के लिए आय का कोई वैध स्रोत नहीं बता पाए। फ्रीज की गई ये संपत्तियां मोहाली के अलग-अलग इलाकों में स्थित हैं, जिनमें गिलको इंडस्ट्रियल पार्क, मोहाली सिटी सेंटर-3, मोहाली सिटी सेंटर वॉक, जनता इंडस्ट्रियल एस्टेट, गैलेक्सी हाइट्स-2 और क्वींसटाउन शामिल हैं।
यह मामला 7 फरवरी 2025 को अमृतसर में 5,000 ट्रामाडोल (Tramadol) टैबलेट जब्त होने के बाद सामने आया। इन टैबलेट की पैकेजिंग पर निर्माता कंपनी 'M/s J R फार्मास्यूटिकल्स' (हरिद्वार) और मार्केटिंग फर्म 'M/s तिवारी मेडिकल एजेंसीज' (देहरादून) के नाम लिखे थे। जांच में पता चला कि मार्केटिंग फर्म असल में मौजूद ही नहीं थी। इसके बाद, NCB ने ड्रग सप्लाई चेन की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया। जांच में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में काम करने वाली कंपनियों के एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ, जो कथित तौर पर फर्जी या अस्तित्वहीन संस्थाओं के नाम पर दवाएं सप्लाई करके अवैध कारोबार चला रही थीं।
34 लाख गोलियां और 10.57 लाख कफ सिरप की बोतलें जब्त
इस ऑपरेशन के तहत अब तक लगभग 34 लाख साइकोट्रोपिक (नशीली) गोलियां, कोडीन-युक्त कफ सिरप की 10.57 लाख बोतलें, ट्रामाडोल के 50,000 एम्प्यूल, मिडाज़ोलम की 5,000 शीशियां और लगभग 2,200 किलोग्राम साइकोट्रोपिक पाउडर जब्त किया गया है। इसमें कच्चा माल और तैयार फार्मास्युटिकल उत्पाद, दोनों शामिल हैं। जांच के दौरान 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। NCB के अनुसार, यह नेटवर्क सात राज्यों—पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश—में फैला हुआ था।
तीन आरोपी अभी भी फरार; सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
हिमाचल प्रदेश के काला अंब में स्थित 'M/s डिजिटल विजन' और 'M/s वेलिंटन हेल्थकेयर' से भारी मात्रा में साइकोट्रोपिक दवाएं और कच्चा माल बरामद किया गया। NCB के अनुसार, अंबाला कैंट के रहने वाले कोनिक गोयल, माणिक गोयल और उनके पिता पुरुषोत्तम लाल गोयल अभी भी फरार हैं। बार-बार समन भेजे जाने और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद, वे जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी अग्रिम जमानत (anticipatory bail) की याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
NCB ने कहा है कि उनका काम सिर्फ नशीले पदार्थों को जब्त करने तक सीमित नहीं है; बल्कि एजेंसी पूरे तस्करी नेटवर्क को निशाना बना रही है, जिसमें इसे चलाने वाले वित्तीय तंत्र भी शामिल हैं। एजेंसी ने आम जनता से अपील की है कि वे ड्रग तस्करी से जुड़ी कोई भी जानकारी 'नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन, 1933 (MANAS)' के जरिए दें। जानकारी देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी। गौरतलब है कि इस साल मई में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 'ऑपरेशन रेज़पिल' (Operation RAZEPILL) नाम से एक बड़ा अभियान चलाया था, जिसमें 227.2 किलोग्राम कैप्टागॉन (Captagon) गोलियां और पाउडर जब्त किया गया था। इस मामले में सीरिया के एक नागरिक को गिरफ्तार किया गया था, जिसने पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां दीं।