मुंबई BMC चुनावों में, AIMIM ने दो प्रमुख मुस्लिम नेताओं के बीच की लड़ाई का फायदा उठाया और 4 सीटें जीतीं। पार्टी ने मानखुर्द-शिवाजी नगर और चेंबूर इलाकों में महत्वपूर्ण जीत हासिल की। राजनीतिक विश्लेषक इसका श्रेय AIMIM के मजबूत संगठनात्मक आधार और मतदाताओं के बीच बँटे हुए वोट बैंक को देते हैं।
महाराष्ट्र में इस साल के मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों में राजनीतिक समीकरणों ने एक चौंकाने वाला मोड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अबू आज़मी और NCP (अजित पवार गुट) के कद्दावर नेता नवाब मलिक के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्ष का सीधा फायदा AIMIM को मिला। इस सत्ता संघर्ष के बीच, AIMIM ने मुंबई में कुल 4 सीटें जीतीं, जिससे स्थानीय राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।
AIMIM के उम्मीदवार कहाँ जीते?
AIMIM के उम्मीदवारों ने मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में जीत हासिल की, जिससे AIMIM और उसके नेता असदुद्दीन ओवैसी को जश्न मनाने का मौका मिला। आइए उन 4 वार्डों को देखें जहाँ पार्टी जीती:
AIMIM की सबसे बड़ी जीत वार्ड नंबर 136 से मिली, जहाँ ज़मीर कुरैशी विजयी हुए। यह इलाका मानखुर्द-शिवाजी नगर के पास स्थित है और इसमें वार्ड 137 और 134 भी शामिल हैं। ज़मीर कुरैशी को कुल 14,921 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 9,923 वोटों के बड़े अंतर से हराया।
इस जीत को AIMIM के मजबूत संगठनात्मक आधार का प्रमाण माना जा रहा है।
वार्ड नंबर 137 में, AIMIM के समीर रमज़ान पटेल विजयी हुए। अंतिम गिनती में, उन्हें कुल 9,436 वोट मिले और उन्होंने 4,568 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। यह इलाका भी मानखुर्द-शिवाजी नगर के पास है, जहाँ बँटे हुए मतदाताओं का असर साफ दिखाई दे रहा था।
तीसरी जीत वार्ड नंबर 145 से मिली, जहाँ AIMIM उम्मीदवार खैरुनिशा अकबर हुसैन ने आरामदायक बढ़त हासिल की और जीत हासिल की। यह इलाका चीता कैंप, चेंबूर की तरफ स्थित है। AIMIM ने अपनी चौथी जीत वार्ड नंबर 134 में हासिल की। इस सीट से AIMIM की मेहजबीन अतीक अहमद ने अपनी पार्टी का झंडा फहराया।
इन नतीजों में एक मजबूत राजनीतिक संदेश छिपा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि समाजवादी पार्टी के नेता अबू आज़मी और NCP नेता नवाब मलिक के बीच चल रहे मतभेदों ने एक खास वोट बैंक को बाँट दिया। AIMIM को इस बंटवारे का फायदा हुआ, क्योंकि उसने ज़मीनी स्तर पर एक ऑर्गेनाइज़्ड कैंपेन चलाया था। BMC चुनावों को मुंबई की राजनीति में सबसे अहम पड़ाव माना जाता है। इन चुनावों के नतीजे अक्सर राज्य की राजनीति की दिशा तय करते हैं। इस संदर्भ में AIMIM की चार सीटों पर जीत को एक बहुत मज़बूत राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।